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Sunday, 1 November 2020

फ्लोरीन Fluorine

फ़्लोरीन आवर्त सारणी के सप्तसमूह का प्रथम तत्वहै, जिसमें सर्वाधिक अधातु गुण वर्तमान हैं। इसका एक स्थिर समस्थानिक प्राप्त है और तीन रेडियोऐक्टिव समस्थानिक कृत्रिम साधनों से बनाए गए हैं। इस तत्व को 1886 ई. में मॉयसाँ ने पृथक्‌ किया था। अत्यंत क्रियाशील तत्व होने के कारण इसको मुक्त अवस्था में बनाना अत्यंत कठिन कार्य था। मॉयसाँ ने विशुद्ध हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा पोटैशियम फ्लोराइड के मिश्रण के वैद्युत्‌ अपघटन द्वारा यह तत्व प्राप्त किया था। फ़्लोरीन मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता।
फ़्लोरीन समस्त तत्वों में अपेक्षाकृत सर्वाधिक क्रियाशील पदार्थ है। हाइड्रोजन के साथ यह न्यून ताप पर भी विस्फोट के साथ संयुक्त हो जाता है।
फ़्लोरीन का उपयोग कीटमारक के रूप में होता है। इसके कुछ यौगिक, जैसे यूरेनियम फ्लुओराइड, परमाणु ऊर्जा प्रयोगों में प्रयुक्त होते हैं। फ़्लोरीन के अनेक कार्बनिक यौगिक प्रशीतन उद्योग तथा प्लास्टिक उद्योग में काम आते हैं।
हाइड्रोफ्लुओरिक अम्ल अथवा हाइड्रोजन फ्लुओराइड (HF) अथवा (H2F2) अत्यंत विषैला पदार्थ है इसका विशुद्ध यौगिक विद्युत्‌ का कुचालक है। इसका जलीय विलयन तीव्र आम्लिक गुण युक्त होता है। यह काच पर क्रिया कर सकता है तथा सिलिकन फ्लुओराइड बनाता है। इस गुण के कारण इसका उपयोग काच पर निशान बनाने में होता है। हाइड्रोफ्लुओरिक अम्ल के लवण फ्लुओराइड कहलाते हैं। कुछ फ्लुओराइड जल में विलेय होते हैं।

Friday, 23 June 2017

रसायन शास्त्र

लवण (Salt):-
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अम्ल एवं भस्म की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप लवण बनता है। इसमें लवण के अलावा जल का भी निर्माण होता है।
लवणों का उपयोग [Uses]:-
✔ खाने का सोडा या बेकिंग सोडा या सोडियम बाईकार्बोरेट (NaHCO3) का बेकिंग पाउण्डर के रूप में, पेट की अम्लीयता को दूर करने में एवं अग्निनाशक यंत्रों में उपयोग होता है।
साधारण नमक अर्थात् सोडियम क्लोराइड (NaCl) का खाने में, अचार के परिरक्षण तथा मांस एवं मछली के संरक्षण (Preservation) में उपयोग किया जाता है।
कास्टिक सोडा या सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) का अपमार्जक का चूर्ण बनाने में उपयोग होता है।
धोवन सोडा या सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3 ) का उपयोग कपड़े धोने में होता है।
पोटेशियम नाइट्रेट या शोरा (KNO3) का बारूद बनाने में एवं उर्वरक के रूप में उपयोग होता है। पोटेशियम नाइट्रेट को साल्टपीटर (Saltpeter) भी कहते है।
काॅपर सल्फेट का उपयोग विद्युत लेपन में एवं रंगाईछपाई में होता है।

भस्म (Base):-
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ऐसा यौगिक जो अम्ल से प्रतिक्रिया कर लवण एवं जल देता हो, जिसमें प्रोटाॅन ग्रहण करने की प्रवृत्ति हो एवं जल में घुलने से हाइड्राॅक्सिल आयन (OH-) देता हो, भस्म [Bases] कहलाता है।
भस्म स्वाद में कड़वा होता है तथा यह लाल लिट्मस को नीला कर देता है।
भस्मों का उपयोग [Uses]:-
दैनिक जीवन में कैल्शियम हाइड्राक्साइड [Ca(OH)2] का इस्तेमाल घरों में चूना पोतने में, गारा एवं प्लास्टर बनाने में, मिट्टी की अम्लीयता दूर करने में, ब्लीचिंग पाउण्डर बनाने में, जल को मृदु बनाने में तथा जलने पर मरहम-पट्टी करने में किया जाता है।
कास्टिक सोडा (NaOH) का साबुन बनाने, पेट्रोलियम साफ करने, कपड़ा एवं कागज बनाने आदि में किया जाता है।
✔ खाली चूना (CaO) का मकान बनाने में गारा के रूप में, शीशा तथा ब्लीचिंग पाउडर बनाने में किया जाता है।
पेट की अम्लीयता को दूर करने में मिल्क आॅफ मैग्नेशिया या मैग्नेशियम हाइड्राॅक्साइड Mg(OH)2 का प्रयोग होता है।

अम्ल (Acid):-
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ऐसा यौगिक जो जल में घुलकर हाइड्रोजन (H+) आयन देता है तथा जो किसी दूसरे पदार्थ को प्रोटाॅन प्रदान करने की क्षमता रखता है, अम्ल (Acid) कहलाता है। अम्ल स्वाद में खट्टे होते है तथा अम्ल का जलीय विलयन नीले लिट्मस पेपर को लाल कर देता है।
अम्लों का प्रयोग [Uses]:-
दैनिक जीवन में खाने के काम में, जैसेः- अंगूर में टार्टरिक अम्ल के रूप में, नीबू एवं नारंगी में- साइट्रिक अम्ल, चीनी में- फार्मिक अम्ल, सिरका एवं अचार में- एसीटिक अम्ल, खट्टे दूध में- लैक्टिक अम्ल, सेब में- मैलिक अम्ल, सोडावाटर एवं अन्य पेय पदार्थो में- कार्बनिक अम्ल के रूप में पाया जाता है।
आॅक्जैलिक अम्ल का प्रयोग कपड़े सेजंग के धब्बे हटाने में तथा फोटोग्राफी में किया जाता है।
H2SO4 एवं HNO3 का प्रयोग विस्फोटकों, उर्वरकों, दवाओं को बनाने तथा लोहे को साफ करने में आदि में होता है।
✔ सोना एवं चाँदी के शुद्धीकरण में नाइट्रिक अम्ल का प्रयोग किया जाता है।
✔ खाना पचाने में HCL अम्ल का प्रयोग होता है।

Monday, 12 June 2017

लिथियम Li

लिथियम (अंग्रेज़ी:Lithium) आवर्त सारणी का तृतीय तत्व है। लिथियम का प्रतीकानुसार Li तथा परमाणु संख्या 3 होती है। लिथियम का परमाणु भार 6.941 है। लिथियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s1, 2s2 होता है।
1.लिथियम चाँदी की तरह उजली धातु है।
2.लिथियम का घनत्व 0.534 होता है।
3.लिथियम मुलायम होता है एवं इसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।
4.लिथियम ऊष्मा और विद्युत का सुचालक होता है।
साधारण परिस्थितियों में यह प्रकृति की सबसे हल्की धातु और सबसे कम घनत्व-वाला ठोस पदार्थ है। रासायनिक दृष्टि से यह क्षार धातु समूह का सदस्य है और अन्य क्षार धातुओं की तरह अत्यंत अभिक्रियाशील (रियेक्टिव) है, यानि अन्य पदार्थों के साथ तेज़ी से रासायनिक अभिक्रिया कर लेता है। यदी इसे हवा में रखा जाये तो यह जल्दी ही वायु में मौजूद ओक्सीजन से अभिक्रिया करने लगता है, जो इसके शीघ्र ही आग पकड़ लेने में प्रकट होता है। इस कारणवश इसे तेल में डुबो कर रखा जाता है। तेल से निकालकर इसे काटे जाने पर यह चमकीला होता है लेकिन जल्द ही पहले भूरा-सा बनकर चमक खो देता है और फिर काला होने लगता है। अपनी इस अधिक अभिक्रियाशीलता की वजह से यह प्रकृति में शुद्ध रूप में कभी नहीं मिलता बल्कि केवल अन्य तत्वों के साथ यौगिकों में ही पाया जाता है। अपने कम घनत्व के कारण लिथियम बहुत हलका होता है और धातु होने के बावजूद इसे आसानी से चाकू से काटा जा सकता है।
आम जीवन मे लिथियम का प्रयोग बैटरी के रूप मे होता है। दो प्रकार की लिथियम बैटरी प्रचलित है।
लिथियम पॉलिमर (लि-पॉली) बैटरी
लिथियम पॉलिमर (लि-पॉली) बैटरी लि-पॉली बैटरीज में सबसे नई और आधुनिक तकनिक है। इससे बैटरी अत्यंत हल्की हो जाती है, इन पर मेमोरी का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता और यह एक निकल धातु से वनी हाइब्रिड (एनआइएमएच) (जिसे आप कैमरे में प्रयोग करते हैं) के बराबर आकार के बावजूद इससे 40 फीसदी अधिक बैटरी क्षमता देती है।
"मेमोरी इफेक्ट" वह होता है जब रिचार्जेबल बैटरी अपने चार्ज साइकिल से पहले पूरी तरह से डिस्चार्ज न हुई हो; इसके चलते बैटरी न समय से पहले हुए चार्ज को "याद रखती" है जिससे इसकी केपिसिटी कम हो जाती है। डिवाइसेज जैसे कि ब्लैकबेरी प्लेबुक, सैमसंग गैलेक्सी एस3 में इसी तरह की बैटरी का इस्तेमाल होता है।
लिथियम आइओएन (लि-आइऑन) बैटरी
यह सेल फोन बैटरीज में सबसे ताजातरीन और प्रचलित टेक्नोलॉजी है। लिथियम आइऑन सेल फोन बैटरी का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि वो महंगी होती हैं। हालांकि, इनमें लि-पॉलिमर के मुकाबले ज्यादा ऊर्जा संग्रहीत होती है।
लि-आइऑन और लि-पॉलिमर बैटरीयों में एक जैसी रासायनिक संरचना होती है लेकिन इसके ज्यादा गर्म होने की प्रवृत्ति में अंतर होता है। इसी कारण, लिथियम आइऑन बैटरी में एक्टिव प्रोटेक्शन सर्किट होता है- जो ऑनबोर्ड कम्पयूटर में जरूरी होता है- इससे बैटरी के ज्यादा गर्म होने पर और धमाके से आग लग जाने से बचाव होता है।
लिथियम पॉलिमर बैटरियों को एक्टिव प्रोटेक्शन सर्किट की जरूरत नहीं होती, इसी के चलते इनका निर्माण एक क्रेडिट कार्ड के साइज में भी हो सकता है।

सोडियम Na

सोडियम (Sodium ; संकेत, Na) एक रासायनिक तत्त्व है। यह आवर्त सारणी के प्रथम मुख्य समूह का दूसरा तत्व है। इस समूह में में धातुगण विद्यमान हैं। इसके एक स्थिरसमस्थानिक (द्रव्यमान संख्या 23) और चार रेडियोसक्रिय समस्थानिक (द्रव्यमन संख्या 21,22,23,24) ज्ञात हैं।

सोडियम धातु का निष्कर्षण कास्टनर विधि द्वारा द्रविण सोडियम हाइड्रॉक्साइड के वैद्युत् अपघटन से किया जाता है। सोडियम चाँदी के समान सफ़ेद धातु है। सोडियम मुलायम होता है एवं इसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता है। सोडियम का आपेक्षित घनत्व 0.97 होता है। पानी से हल्का होने के कारण यह पानी पर तैरने लगता है। सोडियम विद्युत का सुचालक होता है। सोडियम धातु बेंजीन तथा ईथन में विलेय होता है।
अत्यंत ही क्रियाशील तत्व होने के कारण यह मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है। संयुक्त अवस्था में यह पर्याप्त मात्रा में क्लोराइड, नाइट्रेट, कार्बोनेट, बोरेट और सल्फेट के रूप में पाया जाता है।
सोडियम रुपहली चमकदार धातु है। वायु में ऑक्सीकरण के कारण इसपर शीघ्र ही परत जम जाती है। यह नरम धातु है तथा उत्तम विद्युत चालक है क्योंकि इसके परमाणु के बाहरी कक्ष का इलेक्ट्रान अत्यंत गतिशील होने के कारण शीघ्र एक से दूसरे परमाणु पर जा सकता है। इसके कुछ भौतिक स्थिरांक नीचे दिये गये हैं-
परमाणु संख्या 11,
परमाणु भार 22.99
घनत्व 0.97 ग्राम/घन सेमी,
गलनांक 97.8 °C
क्वथनांक 892 °C
सोडयम धातु के परमाणु अपना एक इलेक्ट्रॉन खोकर सोडियम आयन में सरलता से परिणत हो जाते हैं। फलत: सोडियम अत्यंत शक्तिशाली अपचायक (reductant) है। इसकी क्रियाशीलता के कारण इसे निर्वात या तैल में रखते हैं। जल से यह विस्फोट के साथ क्रिया कर हाइड्रोजन मुक्त करता है। वायु में यह पीली लपट के साथ जलकर सोडियम आक्साइड (Na2O) तथा सोडियम परआक्साइड (Na2O2) का मिश्रण बनाता है।
हेलोजन तत्व तथा फॉस्फोरस के साथ सोडियम क्रिया करता है। विशुद्ध अमोनिया द्रव में सोडियम घुलकर नीला विलयन देता है। पारद से मिलकर यह ठोस मिश्रधातु बनाता है। यह मिश्रधातु अनेक क्रियाओं में अपचायक के रूप में उपयोग की जाती है।
उपयोग
सोडियम धातु का उपयोग अपचायक के रूप में होता है। सोडियम परआक्साइड (Na2O2), सोडियम सायनाइड (NaCN) और सोडेमाइड (NaNH2) के निर्माण में इसका उपयोग होता है। कार्बनिक क्रियाओं में भी यह उपयोगी है। लेड टेट्राएथिल [Pb(C2H5)4] के उत्पादन से सोडियम-सीस मिश्रधातु उपयोगी है। सोडियम में प्रकाशवैद्युत (Photo-electric) गुण है। इसलिए इसको प्रकाश वैद्युत सेल बनाने के काम में लाते हैं। कुछ समय से परमाणु ऊर्जा द्वारा विद्युत उत्पादन में सोडियम धातु का बृहद् उपयोग होने लगा है। परमाणु रिऐक्टर (Atomic reactor) द्वारा उत्पन्न ऊष्मा को तरल सोडियम के चक्रण (Circulation) द्वारा जल वाष्प बनाने के काम में आते हैं और उत्पन्न वाष्प द्वारा टरबाइन चलने पर विद्युत् का उत्पादन होता है।
सोडियम के अनेक यौगिक चिकित्सा में काम आते हैं। आज के औद्योगिक युग में सोडियम तथा उसके यौगिकों का प्रमुख स्थान है।

मैग्नीशियम Mg

मैग्नीशियम (अंग्रेज़ी:Magnesium) का प्रतीकानुसार Mg तथा परमाणु संख्या 12 होती है। मैग्नीशियम का परमाणु द्रव्यमान 24.32 होता है। मैग्नीशियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s2, 2s2, 2p6, 3s2 है।
प्राप्ति
मैग्नीशियम सल्फेट के रूप में मैग्नीशियम झरने में तथा मैग्नीशियम क्लोराइड के रूप में समुद्री जल में पाया जाता है। पौधे को हरा रंग देने वाले कार्बनिक यौगिक क्लोरोफिल में भी मैग्नीशियम उपस्थित रहता है।
निष्कर्षण
मैग्नीशियम धातु का निष्कर्षण मुख्यतः कार्नालाइड (KCI.MgCI2. 6H2O) अयस्क से किया जाता है।
भौतिक गुण
मैग्नीशियम चाँदी की तरह उजली एवं चमकीली धातु है।
मैग्नीशियम मुलायम, नम्य तथा प्रतन्य धातु है। अतः इसे आसानी से तार या फीते के रूप में प्राप्त किया जा सकता है।

मैग्नीशियम का द्रवणांक 650डिग्री.C तथा क्वथनांक 110 डिग्री.C होता है। मैग्नीशियम का आपेक्षित घनत्व 1.75 होता है।
रासायनिक गुण
1.तनु अम्लों के साथ प्रतिक्रिया कर यह हाइड्रोजन गैस बनाता है।
2.मैग्नीशियम क्षार से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं करती है।
3.तनु नाइट्रिक अम्ल के साथ यह मैग्नीशियम नाइट्रेट तथा अमोनिया नाइट्रेट बनाता है।
4.शुष्क ईथर की उपस्थिति में यह इथाइल आयोडाइड या ब्रोमाइड से प्रतिक्रिया करके इथाइल मैग्नीशियम आयोडाइड या ब्रोमाइड बनाता है, जिसे ग्रिगनार्ड प्रतिकारक कहते हैं।
5.मैग्नीशियम नाइट्रोजन के साथ प्रतिक्रिया करके मैग्नीशियम नाइट्राइड बनाता है।
मैग्नीशियम के उपयोग
1.फ्लैश लाइट रिबन बनाने में
2.फोटोग्राफी एवं आतिशबाज़ी में
3.ग्रिगनार्ड प्रतिकारक बनाने में
4.मिश्रधातुओं के निर्माण में
मैग्नेशियम का एक भाग मानव-शरीर की प्रत्येक कोशिका में होता है। यह भाग अतिसूक्ष्म हो सकता है, किंतु महत्त्वपूर्ण अवश्य होता है। सम्पूर्ण शरीर में मैग्नेशियम की मात्रा 50 ग्राम से कम होती है। शरीर में कैल्शियम और विटामिन सी का संचालन, स्नायुओं और मांसपेशियों की उपयुक्त कार्यशीलता और एन्जाइमों, को सर्किय बनाने के लिये मैग्नेशियम आवश्यक है। कैल्शियम-मैग्नेशियम सन्तुलन में गड़बड़ी आने से स्नायु-तंत्र दुर्बल हो सकता है।
एक गिलास भारी जल मैग्नेशियम के लियें खाघ-संपूरक है। भारी जल में निरपवाद रुप से उच्च मैग्नेशियम का अंश होता है। भारी जल का प्रयोग करने वाले क्षेत्रों में हृदयाघात न्य़ूनतम होते हैं। इसके अन्य महत्वपूर्ण स्त्रोत है सम्पूर्ण अनाज विशेषकर साबुत अनाज, दाल, सोयाबीन, बादाम, केला, उबले आलू, गिरीदार फ़ल, हरी पत्तीदार सब्जियां, डेरी उत्पाद और समुद्र से प्राप्त होने वाले आहार।

Friends Forever

फ्लोरीन Fluorine

फ़्लोरीन आवर्त सारणी के सप्तसमूह का प्रथम तत्वहै, जिसमें सर्वाधिक अधातु गुण वर्तमान हैं। इसका एक स्थिर समस्थानिक प्राप्त है और तीन रेडियोऐक्...